• देवकी रामधारी फाउंडेशन के प्रयास से श्री प्रेम सुख बंसल का नेत्रदान, जरूरतमंदों के जीवन में नई उम्मीद जगाने की पहल…
रायगढ़। समाजसेवा और मानवता की प्रेरणादायी मिसाल पेश करते हुए श्री प्रेम सुख बंसल जी (78 वर्ष) के परिवार ने उनके निधन के पश्चात नेत्रदान का संकल्प लेकर अनुकरणीय पहल की है। उनके नेत्रदान से दो जरूरतमंद लोगों के जीवन में नई रोशनी आने की उम्मीद है।
श्री प्रेम सुख बंसल जी, श्री सुशील बंसल एवं श्री कृष्ण कुमार बंसल के पिता थे। उनके निधन के बाद परिवार द्वारा नेत्रदान के लिए सहमति प्रदान करना न केवल मानवीय संवेदनशीलता और सेवा भावना का परिचायक है, बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है कि जीवन समाप्त होने के बाद भी किसी के जीवन में उजाला लाया जा सकता है।
इस पुनीत कार्य को संपन्न कराने में देवकी रामधारी फाउंडेशन के संस्थापक चेयरमैन श्री दीपक अग्रवाल डोरा जी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस अवसर पर श्री आनंद बंसल जी भी उपस्थित रहे और नेत्रदान की इस प्रक्रिया में अपना सहयोग प्रदान किया।
डॉ. संतोष कश्यप के मार्गदर्शन में डॉ. सेफाली अग्रवाल एवं उनकी टीम, मेडिकल कॉलेज, रायगढ़ द्वारा नेत्रदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई।
श्री प्रेम सुख बंसल जी की आंखें भले ही अब इस दुनिया को नहीं देख पाएंगी, लेकिन उनके नेत्र किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में नई रोशनी और उम्मीद लेकर आएंगे। उनका यह नेत्रदान इस बात का प्रतीक है कि इंसान के जाने के बाद भी उसकी मानवता, संवेदनशीलता और सेवा की भावना जीवित रह सकती है।
नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में जुटा देवकी रामधारी फाउंडेशन
देवकी रामधारी फाउंडेशन द्वारा समाज में नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से लगातार विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम एवं अभियान चलाए जा रहे हैं। फाउंडेशन का उद्देश्य लोगों को नेत्रदान के महत्व से अवगत कराना तथा अधिक से अधिक परिवारों को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित करना है, ताकि जरूरतमंद लोगों के जीवन से अंधकार दूर कर उन्हें नई रोशनी प्रदान की जा सके।
फाउंडेशन के प्रयासों से पूर्व में जैन परिवार द्वारा भी अपनी माताजी के निधन के पश्चात नेत्रदान कराया गया था। ऐसे निरंतर प्रयास यह दर्शाते हैं कि समाज में मानवता और सेवा की भावना को नई दिशा मिल रही है तथा लोग मृत्यु के बाद भी दूसरों के जीवन में योगदान देने के लिए आगे आ रहे हैं।
नेत्रदान केवल किसी व्यक्ति की दृष्टि को दूसरे जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि यह मानवता, संवेदना और परोपकार की उस भावना का प्रतीक है, जिसमें व्यक्ति अपने जीवन के बाद भी किसी अनजान इंसान के जीवन में उजाला छोड़ जाता है। आवश्यकता है कि समाज में इस विषय को लेकर और अधिक जागरूकता बढ़े तथा प्रत्येक व्यक्ति अपने परिवार के साथ नेत्रदान के संकल्प पर विचार करे।
देवकी रामधारी फाउंडेशन का प्रयास है कि नेत्रदान के प्रति जागरूकता का संदेश जन-जन तक पहुंचे और “अंधकार मुक्त भारत” के सपने को साकार करने में समाज की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित हो।
श्री प्रेम सुख बंसल जी का यह नेत्रदान उनके परिवार के साथ-साथ पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण है। उनका यह पुनीत कार्य संदेश देता है कि जीवन का अंत हो सकता है, लेकिन मानवता की रोशनी कभी खत्म नहीं होती।








