Thursday, March 5, 2026
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विवेचना अधिकारी उप निरीक्षक गिरधारी की मेहनत रंग लाई, नाबालिग को मिला न्याय…

नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दोषी को 20 साल सश्रम कारावास, एफटीएसटी (पॉक्सो) कोर्ट ने सुनाया फैसला

रायगढ़। थाना जूटमिल के नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल के दिशा निर्देशन और विवेचना अधिकारी उप निरीक्षक गिरधारी की विवेचना पर आरोपी प्रकाश दास महंत उर्फ बाटू उर्फ बादशाह (34 वर्ष) को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्री देवेंद्र साहू, एफटीएसटी (पॉक्सो) न्यायालय रायगढ़ ने दोषसिद्ध कर 20 वर्ष सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।

 मामले के अनुसार अप्रैल 2024 से जून 2024 के बीच आरोपी ने 16 वर्ष से कम उम्र की किशोरी के साथ लगातार दुष्कर्म किया था जिस पर थाना जूटमिल में अपराध क्रमांक 290/2024 धारा 376(3), 376(2)(ढ),376(2),506 बी भारतीय दंड संहिता धारा 5 (ठ)(ढ)भादवि धारा 6 पॉक्सो एक्ट के आरोपी प्रकाश दास महंत उर्फ बाटू उर्फ बादशाह  के विरूद्ध पंजीबद्ध किया गया । एसपी दिव्यांग पटेल ने जिले के सभी विवेचना अधिकारी को निर्देश दिए थे कि ऐसे मामले में ठोस और अखंडनीय साक्ष्य जुटाए जाएं जिससे अदालत में आरोपी को कठोरतम सजा मिले। एसपी के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए उप निरीक्षक गिरधारी ने अथक परिश्रम से गवाहों के बयान, वैज्ञानिक साक्ष्य और दस्तावेजी प्रमाण जुटाए तथा केस को इस तरह प्रस्तुत किया कि अदालत में आरोपी अपनी सफाई में कुछ भी साबित नहीं कर सका।

 विवेचना अधिकारी की मेहनत और एसपी के मार्गदर्शन से अभियोजन पक्ष को मजबूत आधार मिला। अदालत में अपर लोक अभियोजक श्री मोहन सिंह ठाकुर ने इन साक्ष्यों को मजबूती से पेश किया, जिसके बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषसिद्ध कर 20 वर्ष सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया।

इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि पुलिस अधीक्षक की सख्त निगरानी और विवेचना अधिकारी की निष्ठा जब मिलती है, तो पीड़ितों को न्याय दिलाना सुनिश्चित होता है और समाज में कानून का भय और विश्वास दोनों ही मजबूत होते हैं।

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