Monday, April 27, 2026
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रायगढ़ में फिर दिखे बाघ के पदचिन्ह: लैलूंगा के जंगलों में मिले ताजे पांव के निशान, गांवों में मुनादी के बाद फैली दहशत – वन विभाग हाई अलर्ट पर…

रायगढ़। रायगढ़ जिले में एक बार फिर बाघ की मौजूदगी की आशंका ने वन विभाग को सतर्क कर दिया है। इस बार बाघ के पैरों के ताजे निशान लैलूंगा रेंज के फुटहामुड़ा और फुलीकुंडा इलाके के जंगल और खेतों में देखे गए हैं। इससे पहले छाल रेंज में भी बाघ की मौजूदगी के संकेत मिल चुके थे, और अब लैलूंगा क्षेत्र में भी पदचिन्ह मिलने से गांवों में भय और सतर्कता का माहौल है।

ग्रामीणों ने देखे निशान, वन विभाग अलर्ट

रविवार सुबह ग्रामीणों ने जंगल की ओर जाते वक्त खेतों और कच्चे रास्तों पर बड़े-बड़े पंजों के निशान देखे। जानकारी मिलते ही ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। एसडीओ एम. एल. सिदार के नेतृत्व में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पदचिन्हों का मुआयना किया।

पदचिन्ह की लंबाई लगभग 16 सेंटीमीटर और चौड़ाई 14 सेंटीमीटर बताई गई है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह बाघ पूर्णतः व्यस्क नहीं है, लेकिन आकार में काफी बड़ा है।

ट्रैकिंग में जुटा वन अमला

वन विभाग ने इलाके में 8 से 10 किलोमीटर तक ट्रैकिंग की, पर अब तक बाघ दिखाई नहीं दिया है। विभाग का अनुमान है कि यह बाघ घरघोड़ा क्षेत्र से होकर लैलूंगा की ओर आया हो सकता है। दियापुर क्षेत्र में भी बाघ जैसे पदचिन्ह मिलने की बात सामने आई है।

गांवों में मुनादी, सतर्कता के निर्देश

बाघ की आशंका को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने फुटहामुड़ा, फुलीकुंडा, चिमटापानी, हल्दीझरिया, दियापुर और तोलगे जैसे गांवों में मुनादी कराई। लोगों को अकेले जंगल न जाने, बच्चों को न भेजने और रात्रि में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। गांवों में डर का माहौल है लेकिन लोग वन विभाग के निर्देशों का पालन कर रहे हैं।

बाघ नहीं दिखा, ट्रैप कैमरे लगाने की तैयारी

अब तक किसी व्यक्ति ने बाघ को देखा नहीं है, लेकिन अगर किसी जानवर के शिकार की जानकारी मिलती है तो क्षेत्र में ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे ताकि उसकी मौजूदगी की पुष्टि की जा सके। वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अफवाह न फैलाएं और यदि कोई पुख्ता जानकारी मिले तो तुरंत विभाग को सूचित करें।

रायगढ़ में लगातार दूसरी बार बाघ की दस्तक से वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो चुका है। लैलूंगा के जंगलों में एक बार फिर ‘वनराज’ की आहट सुनाई दे रही है, लेकिन इस बार खतरा गांवों के और भी करीब है।

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