Tuesday, February 24, 2026
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किडनी फेलियर की ओर बढ़ते कदम थमे; जिला आयुर्वेद चिकित्सालय रायगढ़ के डॉ. रविशंकर पटेल ने आयुर्वेद से किया उपचार…

रायगढ़। आज के समय में अनियंत्रित शुगर शरीर के अन्य अंगों, विशेषकर किडनी के लिए एक बड़ा खतरा बनती जा रही है। जिला आयुर्वेद चिकित्सालय, रायगढ़ में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहाँ आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से न केवल डायबिटीज को नियंत्रित किया गया, बल्कि क्षतिग्रस्त किडनी की कार्यक्षमता को भी पुनः सामान्य स्तर पर लाया गया।

क्या था मामला?

एक 30 वर्षीय युवा मरीज, जिसका सीरम क्रियेटिनिन 1.6 mg/dL और जीएफआर (GFR) लेवल 56 ml/min/1.73m2 तक हो चुका था, उपचार के लिए जिला आयुर्वेद चिकित्सालय पहुँचा। मेडिकल मानकों के अनुसार, 45-59 ml/min के बीच जीएफआर लेवल ‘ग्रेड-3 ए’ किडनी रोग का प्रारंभिक संकेत होता है। एलोपैथी डॉक्टरों ने उसे जीवनभर दवाइयां लेने की सलाह दी थी, लेकिन मरीज ने आयुर्वेद पर भरोसा जताया।

3 महीने में दिखा चमत्कारिक सुधार

जिला आयुर्वेद चिकित्सालय रायगढ़ के डॉ. रविशंकर पटेल के मार्गदर्शन में मरीज का इलाज, उचित आहार, विहार (पथ्य-अपथ्य) और आयुर्वेदिक औषधियों के साथ शुरू किया गया। मात्र 3 महीने के भीतर परिणाम चौंकाने वाले रहे:

* क्रियेटिनिन: 1.6 mg/dLसे घटकर 0.93 mg/dL (सामान्य) हो गया।

* जीएफआर (GFR): 56 ml/minसे बढ़कर 114ml/min हो गया, जो किडनी की पूर्ण कार्यक्षमता को दर्शाता है।

* HbA1c: 6.9 mg/dL से 5.6 /dLmg पर आ गया।

* शुगर कंट्रोल: जीटीटी (GTT) टेस्ट में 2 घंटे बाद शुगर लेवल 82 mg/dl पाया गया, जोकि पूर्णतः सामान्य है।

डॉ. रविशंकर पटेल ने बताया कि अनियंत्रित शुगर किडनी की फिल्टरिंग यूनिट को नुकसान पहुँचाती है, जिसे ‘डायबिटिक नेफ्रोपैथी’ कहते हैं। उन्होंने सलाह दी कि शुगर का बढ़ना एक शारीरिक लक्षण मात्र है, ना कि कोई बीमारी है परंतु लंबे समय तक अनियंत्रित शुगर कई सार्वदैहिक व्याधियों का कारण बनता है जिसमें किडनी रोग भी एक है। अतः शुगर का नहीं बल्कि शुगर के बढ़ने के मूल कारण का उपचार समय पर करना चाहिए ताकि इसके उपद्रव स्वरूप होने वाले गंभीर सार्वदैहिक व्याधियों से बचा जा सके।

> सावधान रहें: रक्त में क्रियेटिनिन का स्तर बढ़ना और GFR का सामान्य से कम होना किडनी की खराबी का प्रारंभिक संकेत है। सामान्यतया किडनी डिजीज़ ग्रेड 3 तक शरीर में कोई लक्षण दिखाई नही देता है परंतु ग्रेड 4 और 5 में शरीर में थकान एवं कमजोरी लगना, पैरों में सूजन, सांस लेने में परेशानी, यूरिन में झाग आना , यूरिन आउटपुट कम होना , उल्टी, शिरदर्द, उच्च रक्तचाप इत्यादि लक्षण दिखाई देने लगते हैं। ग्रेड 5 किडनी डिसीज का लास्ट स्टेज होता है जहां पर डायलिसिस ही अंतिम विकल्प रह जाता है और  इस अवस्था से किडनी को रिवर्स करना संभव नहीं हो पाता है। अतः यदि समय रहते सही जीवनशैली और आयुर्वेद औषधियों का सेवन किया जाये तो किडनी रोग को रिवर्स किया जा सकता है।

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