• 30 साल, 20 कैमरे, और अनमोल धरोहर: कमल शर्मा की प्रेरक यात्रा..
• जिसने कैमरे से रचा रायगढ़ का इतिहास, तस्वीरों में कविता, फोटोग्राफी में दर्शन..
• जिसकी तस्वीरों ने डॉ. कलाम को भी किया प्रभावित..
रायगढ़। छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी और कलाधानी, जहां कला हर कण में बसी है, वहां एक ऐसा शख्स रहता है जिसका कैमरा न केवल तस्वीरें खींचता है, बल्कि कविताएं बुनता और पेंटिंग्स रचता है। यह शख्स है कमल किशोर शर्मा, एक ऐसा फोटोग्राफर, जिसने अपने लेंस के जादू से रायगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को अमर कर दिया। कमल की तस्वीरें बोलती हैं, भावनाओं को जीवंत करती हैं और प्रकृति के साथ परमात्मा के सौंदर्य को दर्शाती हैं। तीन दशकों से अधिक की उनकी यात्रा कला, जुनून और समर्पण की एक प्रेरक गाथा है, जिसने न केवल रायगढ़, बल्कि पूरे देश में उनकी विशिष्ट पहचान बनाई है।

जुनून से शुरू हुआ सफर
11 मई 1967 को रायगढ़ के बैकुंठपुर, कोतरा रोड की शर्मा गली में पं. बैजनाथ शर्मा और श्रीमती नारायणी देवी शर्मा के घर जन्मे कमल का बचपन से ही प्रकृति और फोटोग्राफी के प्रति गहरा लगाव था। मैट्रिक पास करते ही, उन्होंने अपने बचाए हुए पैसों से अपना पहला वनटेन कैमरा खरीदा। “उस पल की खुशी आज भी मेरे दिल को भर देती है,” कमल बताते हैं। 1992 में शुरू हुआ यह शौक 1993 तक एक पेशेवर जुनून में बदल गया। साधारण कैमरे से शुरू हुआ सफर धीरे-धीरे आधुनिक तकनीकों से लैस कैमरों तक पहुंचा, और आज उनकी अलमारी में 20 पुराने कैमरे उनकी इस यात्रा के मूक साक्षी हैं।
कमल का कैमरा केवल तस्वीरें नहीं खींचता, बल्कि रायगढ़ के सामाजिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों को जीवंत करता है। उनके घर का एक कमरा सिर्फ डिजिटल और भौतिक तस्वीरों से भरा हुआ है, जो छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का अनमोल खजाना हैं। रायगढ़ के प्रसिद्ध चक्रधर समारोह से लेकर मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थलों तक, कमल की तस्वीरें एक ऐसी कहानी कहती हैं, जो भावी पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगी।

सम्मान और उपलब्धियों का स्वर्णिम दौर
कमल की प्रतिभा को पहचान मिलने में समय नहीं लगा। 2001 में रायगढ़ के टाउन हॉल में उनकी पहली प्रदर्शनी ने स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा। 2002 में रायपुर के महाकौशल कलावीथिका में आयोजित प्रदर्शनी, जिसका उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल दिनेश नंदन सहाय ने किया, ने उन्हें छत्तीसगढ़ फोटोग्राफी अवार्ड से नवाजा। इस अवसर पर तत्कालीन मंत्री नंदकुमार पटेल, कृष्ण कुमार गुप्ता, चनेशराम राठिया और राम पुकार सिंह जैसे दिग्गज मौजूद थे। इसके बाद कोलकाता का ‘इमेज क्राफ्ट सम्मान’ और लगातार तीन वर्षों तक बेस्ट फोटोग्राफर का अवार्ड उनकी झोली में आया। बिलासपुर, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, भोपाल और बैंगलोर जैसे महानगरों में उनकी प्रदर्शनियों ने कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया।
कमल पिछले 25 वर्षों से जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (JSPL) के लिए आधिकारिक फोटोग्राफर के रूप में नवीन जिंदल परिवार के यादगार पलों को कैद कर रहे हैं। उनकी 136 पृष्ठों की पुस्तिका रायगढ़ दर्शन का विमोचन तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने चक्रधर समारोह में किया, जबकि उनकी पत्रिका रायगढ़ दृष्टि ने रायगढ़ की ऐतिहासिक, पुरातात्विक और धार्मिक धरोहरों को जीवंत किया। उनकी पहल हमारा शहर: हमारी पहचान ने प्रिन्ट और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को रायगढ़ की विरासत से जोड़ा, जो बेहद लोकप्रिय और ज्ञानवर्धक रही।


डॉ. कलाम से मुलाकात: जीवन का स्वर्णिम पल
कमल के जीवन का सबसे यादगार लम्हा तब आया, जब उनकी नियति ने उन्हें भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से मिलवाया। डॉ. कलाम के व्यक्तित्व से प्रभावित कमल ने रायगढ़ कलेक्टर के माध्यम से एक पत्र भेजा, जिसके जवाब में उन्हें 2004 में रायपुर में डॉ. कलाम से मिलने की अनुमति मिली। इस मुलाकात में कमल ने रायगढ़ केंद्रित फोटो एल्बम और छत्तीसगढ़ के पर्यटन की संभावनाओं पर एक पत्र सौंपा। डॉ. कलाम ने उनकी कला की खूब सराहना की। “यह मुलाकात मेरे जीवन का सबसे गौरवपूर्ण पल है,” कमल कहते हैं, उनकी आंखों में गर्व की चमक साफ दिखती है।

कला और संस्कृति का बहुमुखी रत्न
कमल केवल एक फोटोग्राफर नहीं, बल्कि एक बहुमुखी कलाकार हैं। उन्होंने श्री लक्ष्मण संगीत महाविद्यालय से तबला और भाव संगीत की तालीम ली। हालांकि व्यस्तता के कारण वे इसमें पारंगत नहीं हो सके, लेकिन संगीत की उनकी समझ उनकी तस्वीरों में भावनाओं को और गहराई देती है। रायगढ़ की प्रसिद्ध रामलीला में उनके अभिनय और चेहरे के भाव दर्शकों को मंत्रमुग्ध करते हैं। उनके गुरु, कलागुरु वेदमणि सिंह ठाकुर कहते हैं, “कमल शुरू से ही कला और संस्कृति के प्रति समर्पित रहे हैं। फोटोग्राफी में तो वे माहिर हैं, लेकिन संगीत में भी उनकी गहरी रुचि है।”

कमल एक समाजसेवी और सहृदय सहयोगी भी हैं। जब भी किसी को उनकी जरूरत होती है, वे तुरंत हाजिर हो जाते हैं। उनकी कोशिश है कि रायगढ़ की प्रतिभाएं कभी गुमनामी के अंधेरे में न खोएं। “रायगढ़ की माटी का कर्ज मैं कभी नहीं चुका सकता। यहां प्रतिभाओं का अकूत भंडार है, और मैं उन्हें एक मंच देना चाहता हूं,” वे कहते हैं।
सितारों के खत और स्मृतियों का गुलदस्ता
कमल का एक और अनमोल संग्रह है—नामचीन हस्तियों और फिल्मी सितारों के लिखे पत्र और तस्वीरें। बचपन से ही उन्हें पत्र लिखने का शौक था, और युवावस्था में उन्होंने देश के दिग्गजों और सितारों से पत्राचार शुरू किया। ये पत्र आज एक मीठी दास्तां बन गए हैं, जो उनके संग्रह की शोभा बढ़ाते हैं। “इन पत्रों को पढ़कर दिल अपनत्व और स्नेह से भर जाता है,” कमल कहते हैं।

युवाओं के लिए प्रेरणा
कमल युवाओं को संदेश देते हैं, “आज की हाई-टेक तकनीक ने फोटोग्राफी को आसान बना दिया है। मेहनत और लगन से इस क्षेत्र में उज्ज्वल भविष्य बनाया जा सकता है।” वे मानते हैं कि फोटोग्राफी न केवल एक कला है, बल्कि एक ऐसा माध्यम है, जो कैरियर को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।
अमर धरोहर का सर्जक
कमल शर्मा का 30 वर्षों का सफर केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि रायगढ़ और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संजोने की कहानी है। उनकी तस्वीरें, प्रदर्शनियां, किताबें और पत्रिकाएं भावी पीढ़ियों के लिए एक अनमोल उपहार हैं। “मैं चाहता हूं कि मेरी तस्वीरें देखकर लोग हर्षित हों और भावी पीढ़ी रायगढ़ की स्मृतियों को देखकर मुझे आशीर्वाद दे,” कमल कहते हैं।
कमल के प्रेरणास्रोत: बैजनाथ और नारायणी शर्मा
बैजनाथ शर्मा, रायगढ़ के बैकुंठपुर में एक सम्मानित व्यक्तित्व थे, जिनके संस्कार और नैतिक मूल्यों ने कमल को जीवन में सत्य और मेहनत का पाठ पढ़ाया। उनकी मां नारायणी देवी, एक स्नेहमयी और धार्मिक महिला थीं, जिनकी प्रेरणा और आशीर्वाद ने कमल के भीतर कला और संस्कृति के प्रति गहरा लगाव पैदा किया। इस दंपति की शिक्षाओं ने और अर्धांगिनी शीतल के साथ ने कमल को न केवल एक उत्कृष्ट फोटोग्राफर, बल्कि एक संवेदनशील समाजसेवी और संस्कृति प्रेमी बनाया।

कमल शर्मा का कैमरा आज भी रायगढ़ की धड़कनों को कैद कर रहा है, और उनकी कला प्रेम, समर्पण और सृजन की एक ऐसी मिसाल है, जो हर कला प्रेमी के लिए प्रेरणा है। यह संकलन, उनकी 30 वर्षों की यात्रा, सभी कला प्रेमियों को स्नेह के साथ समर्पित है।
























