Wednesday, March 4, 2026
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नेशनल लोक अदालत में ऐतिहासिक सफलता: रायगढ़ जिले में 7 लाख 19 हजार से अधिक प्रकरणों का सौहार्दपूर्ण निराकरण, 38.83 करोड़ रुपये का हुआ सेटलमेंट…

रायगढ़। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली एवं छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के निर्देशानुसार, 13 दिसम्बर को रायगढ़ जिले में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। आयोजित नेशनल लोक अदालत के अवसर पर सर्वप्रथम जितेन्द्र कुमार जैन, प्रधान जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने जिला न्यायालय रायगढ़ के न्यायालयीन सभागार में मॉ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष द्वीप प्रज्जवलित कर नेशनल लोक अदालत के आयोजन का शुभारंभ किया।

जिला एवं तहसील न्यायालयों में विभिन्न प्रकृति के राजीनामा योग्य मामले जैसे-मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, बैंक वसूली के प्रकरण, आपराधिक मामले, विद्युत मामले, श्रम विवाद, पारिवारिक विवाद, चेक अनादरण, सिविल मामले के साथ-साथ आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 एवं अन्य छोटे अपराधों के मामले, जिसमें यातायात उल्लंघन के मामलों को भी शामिल करते हुए, जिला मुख्यालय रायगढ़ एवं तहसील सारंगढ़, घरघोड़ा, धरमजयगढ, खरसिया, भटगांव, बिलाईगढ़ के न्यायालयों में तथा परिवार न्यायालय, श्रम न्यायालय एवं किशोर न्याय बोर्ड को मिलाकर कुल 26 खण्डपीठों का गठन किया गया। इसके अतिरिक्त रायगढ़ एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ के राजस्व न्यायालयों में भी खण्डपीठों का गठन किया गया। खण्डपीठों में 7792 लंबित प्रकरण एवं 805816 प्रीलिटिगेशन प्रकरण अर्थात कुल 813608 प्रकरण को राजीनामा के आधार पर निराकरण हेतु लोक अदालत में रखा गया।

इस प्रकार रखे गये कुल 813608 प्रकरणों में से 6992 लंबित प्रकरण एवं 712179 प्रीलिटिगेशन प्रकरण निराकृत हुये। इस प्रकार कुल 719171 प्रकरणों का निराकरण, जिला न्यायालय, परिवार न्यायालय, श्रम न्यायालय, किशोर न्याय बोर्ड, उपभोक्ता फोरम रायगढ़ एवं तहसील स्थित व्यवहार न्यायालय सारंगढ़, घरघोड़ा, धरमजयगढ़, खरसिया, भटगांव, बिलाईगढ़ व राजस्व न्यायालय रायगढ़ एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ में राजीनामा के आधार पर किया गया और उन प्रकरणा़ें के अंतर्गत कुल 38 करोड़ 83 लाख 90 हजार 829 रूपये का सेटलमेंट हुआ।

आयोजित लोक अदालत का मूल उद्देश्य आपसी सुलह समझौते के माघ्यम से पारिवारिक विवादों का समाधान कर परिवारों को फिर से जोड़ना और सामाजिक सौहार्द को स्थापित करना हमेशा से रहा हैं। जिसके तहत इस लोक अदालत के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायगढ़ के उद्देश्य के अनुसार आपसी समझौते के तहत परिवार न्यायालय में 02 महत्वपूर्ण प्रकरणों को निपटारा किया गया जिसमें निर्मल इजारदार एवं श्रीमती उषा इजारदार के मध्य आपसी सामंजस्य नहीं बन पाने के कारण विवाह विच्छेद का मामला चल रहा था जिसमें लोक अदालत के दौरान न्यायाधीश द्वारा दोनों पक्षों को समझाईश देते हुए परस्पर साथ में रहने तथा सुखमय जीवन बिताने के लिए आपस में सुलह करने के लिए प्रेरित किया गया जिसे दोनों पक्षों ने स्वीकार करते हुए आपसी मन-मुटाव को समाप्त कर साथ में रहने का निर्णय लिया और एक पारिवारिक विवाद के मामले का सुखद पटाक्षेप किया गया।

इसी तरह दूसरे मामले सुभा नवीन विरूद्ध नंदकिशोर वगैरह में तीन बच्चों के संरक्षण के लिए सरंक्षक प्रतिपाल्य अधिनियम के तहत मामला चल रहा था, इसमें भी विद्वान न्यायाधीश महोदय की प्रेरणा से पिता द्वारा अपने तीन बच्चों का संरक्षण स्वीकार करते हुए आपसी विवाद को खत्म कर अपने परिवार के सुखमय जीवन के लिए राजीनामा कर प्रकरण निराकरण किया। उक्त कार्यक्रम में जिला न्यायालय रायगढ़ के न्यायाधीशगण सहित सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जिला अधिवक्ता संघ रायगढ़ के  अध्यक्ष एवं अन्य अधिवक्तागण, बैंक एवं विद्युत सहित अन्य विभागों के उपस्थित अधिकारीगण तथा राजीनामा के लिए उपस्थित पक्षकारगण, न्यायालयीन कर्मचारीगण एवं विधिक सेवा प्राधिकरण के कर्मचारीगण तथा पैरालीगल वालिंटियर्स उपस्थित रहे।

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