Thursday, January 15, 2026
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बदलता मौसम, बढ़ता स्वास्थ्य संकट: रायगढ़ में जलवायु परिवर्तन, गर्मी और वायु प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों पर 10 दिवसीय प्रशिक्षण…

रायगढ़ । राज्य शासन के दिशा-निर्देशानुसार कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत एवं प्रभारी जिला परिवार कल्याण अधिकारी डॉ. बी.पी. पटेल के निर्देशन में जिले में जलवायु परिवर्तन एवं मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण दिनांक 6 जनवरी से 15 जनवरी तक आयोजित किया जा रहा है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन जिला कार्यक्रम अधिकारी सुश्री रंजना पैंकरा द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. टी.जी. कुलवेदी, जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ. अविनाश चंद्रा, जिला नोडल अधिकारी डॉ. सुमित शैलेन्द्र कुमार मंडल, डॉ. केनन डेनियल, एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. कल्याणी पटेल (आई.डी.एस.पी.) तथा कार्यक्रम के जिला डाटा मैनेजर रामकुमार जांगड़े सक्रिय रूप से सहभागिता कर रहे हैं।

इस प्रशिक्षण के अंतर्गत जिले के सभी विकासखंडों के आर.एम.ए./प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सेक्टर सुपरवाइजर, आर.एच.ओ. (पुरुष/महिला), सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सी.एच.ओ.), बी.डी.एम., डी.ई.ओ., पी.ए.डी.ए. के साथ-साथ जिला एवं जनपद पंचायत सदस्यों को समूहवार निर्धारित तिथियों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

प्रशिक्षण के दौरान जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न हो रही स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि बढ़ता तापमान, असामान्य वर्षा, लू, सूखा, बाढ़, जलस्तर में गिरावट एवं वायु प्रदूषण जैसी समस्याएं मानव जीवन, पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं आजीविका पर गंभीर प्रभाव डाल रही हैं। अत्यधिक गर्मी के कारण हीट स्ट्रोक, श्वसन संबंधी रोग, एलर्जी, जलजनित बीमारियां एवं कुपोषण जैसी समस्याओं में वृद्धि हो रही है, जिसका सर्वाधिक प्रभाव बच्चों, बुजुर्गों एवं गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत ने बताया कि वायु प्रदूषण का प्रभाव अब अस्पतालों में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। सांस फूलना, लगातार खांसी, आंखों में जलन, त्वचा रोग एवं अस्थमा जैसे रोग वायु प्रदूषण की गंभीरता को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण स्वस्थ समाज की नींव है। पर्यावरण संरक्षण से न केवल बीमारियों की रोकथाम होती है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव को भी कम किया जा सकता है।
जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे पर्यावरण संरक्षण को अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी मानें। अधिक से अधिक वृक्षारोपण एवं पौधों का संरक्षण करें, जल स्रोतों की रक्षा करें, वर्षा जल संचयन अपनाएं, प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग करें, स्वच्छ ऊर्जा को अपनाएं तथा कचरे का पृथक्करण एवं पुनर्चक्रण सुनिश्चित करें।

विद्यालयों, शासकीय कार्यालयों, पंचायतों एवं नगरीय निकायों के माध्यम से जनजागरूकता कार्यक्रम, पौधरोपण अभियान, स्वच्छता गतिविधियों एवं पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए हैं। साथ ही नागरिकों से अपील की गई है कि वे साइकिल या पैदल चलने को प्राथमिकता दें। स्वच्छ, सुरक्षित एवं संतुलित वातावरण हमारे वर्तमान और भविष्य दोनों के लिए आवश्यक है। जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से जलवायु परिवर्तन के विरुद्ध इस अभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ पृथ्वी सुनिश्चित की जा सके।

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