Wednesday, March 4, 2026
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रायगढ़ में मानसिक रोगियों के लिए संबल बना ‘अपना घर’ आश्रम, जहां सेवा को कहा जाता है प्रभु भक्ति…

रायगढ़। जिले में मानव सेवा की मिसाल बन चुकी संस्था ’’सदगुरु कृपा अपना घर आश्रम रायगढ़’’ आज मंदबुद्धि और बेसहारा लोगों के लिए एक सुरक्षित आश्रय और परिवार का रूप ले चुकी है। इस संस्था की शुरुआत वर्ष 2020 में ’’संत गुरु सदानंद जी’’ के मार्गदर्शन में रायगढ़ शहर में एक किराये के मकान से की गई थी। सीमित संसाधनों के बावजूद सेवा भाव के साथ प्रारंभ हुई यह पहल आज सशक्त सामाजिक आंदोलन का स्वरूप ले चुकी है।

सेवा कार्य के विस्तार के बाद वर्ष 2022 में संस्था को ग्राम सांगीतराई रायगढ़ स्थित एक विद्यालय भवन क्रय कर वहां स्थानांतरित किया गया, जहां वर्तमान में बेहतर सुविधाओं के साथ संचालन किया जा रहा है। फिलहाल संस्था में लगभग 80 प्रभुजनों की नियमित रूप से सेवा, देखभाल और उपचार किया जा रहा है। पूर्व में अर्ध नग्न मानसिक विकार से पीड़ित लोग शहर में घुमते दिखते थे अब नहीं दिखते हैं, इसका श्रेय ’’अपना घर आश्रम’’ को जाता है। नगर के लोगों से आश्रम के संचालकों ने अपील की है कि यदि ऐसे लोग नगर दिखते हैं, तो रेस्क्यू हेतु आश्रम के मो.न. 9009022001 पर सूचना देने का कष्ट करें।

नियमित चिकित्सा सुविधा

संस्था में रह रहे प्रभुजनों के स्वास्थ्य, साफ सफाई, भोजन प्रसाद का विशेष ध्यान रखा जाता है। प्रत्येक 15 दिनों में रायगढ़ के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. प्रकाश चेतवानी, डॉ अजीत राव, संतोष पांडे एवं डॉ. एम.एल. साहू द्वारा मानसिक रोग एवं शारीरिक रोग की जांच कर आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध कराई जाती है। इसके अतिरिक्त गंभीर मामलों में रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में भी इलाज कराया जाता है। हर महीने के प्रथम रविवार को जिंदल के डॉक्टरों द्वारा आश्रम में कैंप लगाकर निःशुल्क चिकित्सा व दवाइयां भी दी जाती है।

प्रभुजनों के प्रति सम्मान

’’अपना घर’’ की विशेषता यह है कि यहां रहने वाले मानसिक रोगियो को “प्रभु जी” कहकर संबोधित किया जाता है, जिससे उनमें आत्मसम्मान और अपनापन बना रहे। भोजन, वस्त्र, आवास, दवाइयों के साथ-साथ उनके मानसिक पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जाता है। प्रभुजी के ठीक होने पर उनके घर द्वार का पता लगा के पुनर्वास कराया जाता है। लगभग स्वस्थ हो चुके प्रभुजी लोगों को, कई घरवाले  ले जाने से मना कर देते हैं, ऐसी स्थिति में आश्रम में ही क्षमता अनुसार उन्हें सेवा कार्य में लगा दिया जाता है और उनके पारिश्रमिक को उनका बैंक खाता खुलवा कर जमा किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि आश्रम जब किसी वस्तु की आवश्यकता महसूस होती है, तब प्रभु ठाकुर जी के नाम चिट्ठी लिखी जाती है और चम्तकार यह होता है कि समाज के किसी न किसी व्यक्ति के माध्यम से प्रभु ठाकुर 24 घंटे में ही उस आवश्यकता की पूर्ति कर देते हैं। ऐसा संचालकों ने कई बार महसूस किया है, जिसको अनुभव के रूप में हमसे उन्होंने साझा किया।

संगठनात्मक संरचना

संस्था की रायगढ़ शाखा का संचालन समाज के प्रतिष्ठित एवं सेवाभावी व्यक्तियों द्वारा किया जा रहा है। संरक्षक मंडल में सुरेश बंसल, नानक बंसल, दीनदयाल अग्रवाल, संतोष अग्रवाल एवं गौरी शंकर अग्रवाल शामिल हैं। संस्था के अध्यक्ष – राधेश्याम अग्रवाल जी (लेंध्रा), उपाध्यक्ष – विनोद बंसल, सचिव – बजरंग मित्तल, कोषाध्यक्ष – महेश अग्रवाल हैं।

वहीं कार्यकारिणी सदस्यों में अनुप बंसल, नवीन बंसल, गोविन्द अग्रवाल (आर.जे.), बजरंग अग्रवाल (लेंध्रा), अजय अग्रवाल (वेदांता), बजरंग अग्रवाल (मुन्ना साधु), सुशील जिंदल, संजय जिंदल, सतीश अग्रवाल (कोल्ड स्टोर), राकेश बंसल (रोमी) एवं अभिषेक बंसल, राजेश अग्रवाल (चैम्बर) सहित अन्य सेवाभावी लोग सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

मासिक खर्च और सहयोग

संस्था के संचालकों के अनुसार ’’अपना घर’’ के संचालन में प्रतिमाह लगभग 3 लाख 50 हजार रुपये का व्यय आता है। इसमें से 50 हजार रुपये जिंदल ग्रुप द्वारा नियमित सहयोग के रूप में प्रदान किए जाते हैं, जबकि शेष 3 लाख रुपये स्थानीय पदाधिकारियों, सदस्यों एवं दानदाताओं के सहयोग से जुटाए जाते हैं।

समाज के लिए प्रेरणा

’’सदगुरु कृपा अपना घर रायगढ़’’ न केवल मानसिक रूप से मन्द बुद्धि या अर्धविक्षिप्त लोगों के लिए आश्रय है, बल्कि यह समाज को यह संदेश भी देता है कि उपेक्षित और असहाय लोगों को सम्मान और अपनत्व देकर उन्हें भी जीवन की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है। यह संस्था आज रायगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए मानवता, करुणा और सेवा की जीवंत मिसाल बन चुकी है। ’’सतगुरु अपना घर’’ आश्रम रायगढ़ सदगुरु प्रणामी चैरिटेबल ट्रस्ट (रजि) संस्था दिल्ली द्वारा स्वामी श्री श्री सदानंद गुरु जी द्वारा संचालित है। आश्रम में समाज के गणमान्य नागरिकों द्वारा जन्मदिन, पुण्यतिथि, सालगिरह या अन्य खुशी के मौके पर भोग प्रसाद, नाश्ता, वस्त्र, फल, अनाज इत्यादि जरूरत का सामान उत्साह पूर्वक दान स्वरूप दिया जाता है।

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