Thursday, January 15, 2026
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आज लगेगा साल 2025 का अंतिम चंद्र ग्रहण: मंदिरों के कपाट रहेंगे बंद, जानें कब से कब तक दिखेगा, क्या करें और क्या न करें…

• जानें सूतक, धार्मिक मान्यताएं और वैज्ञानिक दृष्टिकोण..

रायगढ़। आज की रात आकाश में एक अद्भुत खगोलीय नजारा दिखाई देगा। भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण 7 सितंबर की रात 9:58 बजे से शुरू होकर 8 सितंबर की सुबह 1:26 बजे तक चलेगा। इस खगोलीय घटना को देखने के लिए लोगों में उत्सुकता है, वहीं धार्मिक मान्यताओं के कारण कई तरह की सावधानियां भी बरती जा रही हैं।

मंदिरों में कब बंद होंगे कपाट?

ग्रहण का सूतक काल आज दोपहर 12:57 बजे से प्रारंभ हो गया है। सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे, जो ग्रहण समाप्त होने के बाद 8 सितंबर को सुबह खुलेंगे। इस दौरान किसी भी प्रकार की पूजा-अर्चना या मूर्तियों का स्पर्श वर्जित रहेगा।

ग्रहण के दौरान क्या न करें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण काल को अशुभ समय माना जाता है। इस दौरान कुछ कार्य करने की मनाही रहती है:

• भोजन और पानी का सेवन न करें।

• धारदार वस्तुओं (कैंची, चाकू, ब्लेड) का प्रयोग न करें।

• यात्रा और सोने से बचें।

• पूजा-पाठ और किसी नए कार्य की शुरुआत वर्जित है।

ग्रहण के दौरान क्या करें

जहां कई कामों पर रोक है, वहीं इस समय कुछ कार्य शुभ फलदायी माने जाते हैं:

• महामृत्युंजय मंत्र या चंद्र मंत्र का जाप करें।

• ध्यान और भक्ति में समय बिताएं।

ग्रहण के बाद क्या करें

ग्रहण समाप्ति के बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार:

• स्नान करें और गंगाजल से घर-पूजा स्थल की शुद्धि करें।

• दान-पुण्य कार्य करें, जिससे ग्रहण दोष से मुक्ति मिलती है।

गर्भवती महिलाओं के लिए सावधानियां

ग्रहण काल को गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से संवेदनशील माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान उन्हें घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और धारदार वस्तुओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, अन्यथा गर्भस्थ शिशु पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

वैज्ञानिक नजरिया

वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति में बदलाव का परिणाम है। खगोलविदों का कहना है कि चंद्र ग्रहण को देखना एक अनोखा अनुभव है। इसे नंगी आंखों से या टेलीस्कोप की मदद से सुरक्षित तरीके से देखा जा सकता है।

यह खगोलीय घटना धार्मिक आस्था और वैज्ञानिक जिज्ञासा का अनोखा संगम है। जहां एक ओर श्रद्धालु लोग परंपराओं का पालन करेंगे, वहीं खगोल विज्ञान प्रेमी आसमान में चांद के बदलते रूप को निहारने का अवसर लेंगे।

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