पत्थलगांव। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में हाथियों के हमले से जनहानि रोकने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वन विभाग का गजरथ के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का विशेष अभियान शुरू कराया है।
गजरथ अभियान के माध्यम से जशपुर वन मंडल में 30 से अधिक गांव के स्कूलों में पहुंच कर चार हजार विद्यार्थी और ग्रामीणों को आवश्यक समझाइश तथा शिक्षक और पंचायत प्रतिनिधियों को भी विशेष सतर्कता कार्यक्रम से जोड़ा जा रहा है।
जशपुर वन मंडल अधिकारी शशिकुमार का कहना है कि गजरथ अभियान से हाथियों से बचाव करने की दिशा में गांव के अंतिम छोर पर पहुंच कर जागरूक करने के अच्छे परिणाम तो सामने आए हैं। लेकिन अपने दल से बिछड़ कर शावक के साथ पत्थलगांव और सीतापुर क्षेत्र में विचरण करने वाली गुस्सेल मादा हाथी ने दर्जनों गांवों में दहशत बढ़ा दी है।
इस उत्तेजित हाथी ने पत्थलगांव के एक सरकारी स्कूल में वन विभाग की टीम पर जानलेवा हमला करने के बाद तमता क्षेत्र में एक किसान को कुचल कर मार डाला था।इसके पहले भी मादा हाथी ने लैलूंगा और बाकारुमा में तीन अन्य लोगों को कुचल कर मौत के घाट उतार दिया है।
जशपुर वन मंडल के अधिकारी शशिकुमार का कहना है कि आक्रामक हाथी के व्यवहार को लेकर यंहा जनहानि की घटनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी बात के मद्देनजर उन्होंने आक्रामक मादा हाथी को ट्रेंकुलाइज कर उसका उसका उपचार करने हेतु संबंधित उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा है।
हाथियों के हमलों को लेकर उच्च अधिकारियों की लापरवाही
सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि जमीनी स्तर पर आक्रामक मादा हाथी की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखने वाले वन अधिकारी के ही सुझाव को उच्च अधिकारियों ने अभी तक गंभीरता से नहीं लिया है। मादा हाथी लगातार पत्थलगांव और सीतापुर क्षेत्र में ही विचरण करने से यंहा कांसाबेल वन परिक्षेत्र के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों में भय व्याप्त है।
पत्थलगांव वन अधिकारी कृपा सिंधु पैंकरा का कहना है कि सरगुजा की सरहद पर विचरण करने वाली मादा हाथी की मौजूदगी चिंता की बात है। इसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
📝 रमेश शर्मा (पत्थलगांव)







