रायगढ़। जिले में भरोसे के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। खरसिया थाना क्षेत्र में एक सरकारी शिक्षक के नाम पर विभिन्न बैंकों से 20 लाख से अधिक का लोन निकलवाकर किस्तों का भुगतान बंद कर दिया गया। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मामा बनकर रचा गया ठगी का जाल
पीड़ित शिक्षक लोकनाथ रात्रे ने पुलिस को बताया कि उनकी पहचान ग्राम सपिया निवासी विद्याचरण गोरे के माध्यम से गिरीश कुमार जोल्हे से हुई थी, जो स्वयं को उनका मामा बताता था। मई 2024 में आरोपी ने शिक्षक को विश्वास में लेकर उनके नाम पर लोन निकलवाने और सभी किस्तें खुद भरने का प्रस्ताव रखा। इसके बदले में आरोपी ने 35 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का लालच दिया।
दस्तावेजों का दुरुपयोग, रकम हड़पी
आरोपी ने शिक्षक के दस्तावेजों का दुरुपयोग करते हुए चोला मण्डलम, ICICI Bank, Axis Bank और State Bank of India से 20 लाख से अधिक रुपये का लोन स्वीकृत कराया। लोन की राशि शिक्षक के खाते में आई, जिसे आरोपी ने विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर अपने कब्जे में ले लिया।
किस्तें बंद, बैंकों के नोटिस से खुली पोल
शुरुआत में कुछ महीनों तक किस्तें चुकाने के बाद आरोपी ने अचानक भुगतान बंद कर दिया। इसके बाद बैंकों ने सीधे शिक्षक से संपर्क करना शुरू किया। बार-बार आश्वासन देने के बावजूद आरोपी ने न तो किस्तें भरीं और न ही लोन चुकाने की पहल की।
पुलिस जांच में जुटी
आखिरकार पीड़ित शिक्षक ने खरसिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी गिरीश कुमार जोल्हे के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लेन-देन, बैंक ट्रांजैक्शन और दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी है।
अपील: किसी भी प्रकार के लोन या वित्तीय लेन-देन में अपने दस्तावेज किसी के भरोसे न सौंपें। लालच या रिश्तेदारी के दबाव में आकर कागजात देना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।
यह मामला एक बार फिर चेतावनी देता है कि भरोसा, लालच और जल्द लाभ—इन तीनों के मेल से ठगी का रास्ता खुल जाता है।







