Thursday, January 15, 2026
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रायगढ़ की बेटी सुलक्षणा पंडित नहीं रहीं: मधुर सुरों और अभिनय से बॉलीवुड में छत्तीसगढ़ का नाम रौशन करने वाली गायिका-अभिनेत्री की विदाई पर संगीत जगत शोक में…

• सीएम साय ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि…

रायगढ़। भारतीय सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री और मधुर स्वर साधिका सुलक्षणा पंडित के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। छत्तीसगढ़ की इस प्रतिभाशाली बेटी ने अपने सुरों से बॉलीवुड और संगीत जगत को एक नया आयाम दिया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि सुलक्षणा जी की कला और साधना की जड़ें रायगढ़ की उस सांस्कृतिक मिट्टी से जुड़ी हैं, जहां संगीत कोई परंपरा नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा है।

मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा, “संगीत और अभिनय की उनकी यात्रा की शुरुआत छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से हुई थी। सुलक्षणा जी की आवाज में सादगी, भाव और इस धरती की सुगंध थी। उन्होंने अपने सुरों से पूरे देश में प्रदेश का नाम रौशन किया। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति और परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति प्रदान करें।”

रायगढ़ की पुरानी बस्ती के रामगुड़ी पारा स्थित अशर्फी देवी महिला चिकित्सालय में जन्मी सुलक्षणा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पैलेस रोड स्थित शासकीय बालिका विद्यालय से प्राप्त की थी। उनके पिता प्रताप नारायण पंडित, राजा चक्रधर सिंह के दरबार के प्रसिद्ध तबला वादक थे। संगीत उनके परिवार की परंपरा थी, और यही संस्कार सुलक्षणना के सुरों में झलका।

🎵 बचपन से ही संगीत साधना

सुलक्षणा पंडित ने मात्र 9 साल की उम्र में गाना शुरू कर दिया था। 1967 में फिल्म ‘तकदीर’ के गीत ‘सात समंदर पार से’ में उन्होंने लता मंगेशकर के साथ अपनी आवाज दी, जिससे वे चर्चित हो गईं। 70 के दशक में वे भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का जाना-पहचाना चेहरा बन गईं।

🎬 अभिनेत्री के रूप में भी चमकी पहचान

सुलक्षणा ने बतौर अभिनेत्री 1975 की फिल्म ‘उलझन’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया। इसके बाद उन्होंने कई लोकप्रिय फिल्मों में अभिनय किया। 1976 में आई फिल्म ‘संकल्प’ के गीत ‘तू ही सागर तू ही किनारा’ के लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उनकी मीठी आवाज और भावपूर्ण प्रस्तुति ने उन्हें संगीतप्रेमियों के दिल में अमर कर दिया।

💔 अधूरी प्रेम कहानी

कहा जाता है कि सुलक्षणा पंडित बॉलीवुड सुपरस्टार संजीव कुमार से प्रेम करती थीं। लेकिन जब उन्होंने उनका प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया, तो सुलक्षणा ने आजीवन विवाह न करने का निर्णय लिया। यह उनके जीवन की एक भावनात्मक कहानी बन गई, जिसने उन्हें और भी विशिष्ट बना दिया।

🎶 अंतिम गीत और अमर विरासत

सुलक्षणा का आखिरी प्लेबैक गीत 1996 में रिलीज हुई फिल्म ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ में था, जिसे उनके भाइयों जतिन-ललित ने संगीतबद्ध किया था। इसके बाद वे संगीत से दूर रहीं, लेकिन उनके स्वर आज भी हर संगीतप्रेमी के दिल में गूंजते हैं।

रायगढ़ की यह प्रतिभाशाली बेटी न केवल अपने अभिनय और गायन से, बल्कि अपनी सादगी और समर्पण से भी याद की जाती रहेंगी।

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